
नओ बरस लैकें आओ,
नयी-नयी सौगात ।
शनीदेव की बक्र है दृष्टि,
उलट-पलट मात ही मात ।।
बीज बोव बरसो न पानी,
दुविधा में आ गओ इन्सान ।
बीज बुबाई,रकम गमाई,
निर्धन हो गयो किसान ।।
अब के बरस न भई बरसात ।
नओ बरस----------------------
कछू तो सोचो कछू भओ है,
खेती किसान की करतार ।
बिन खेती के घरी न बीते,
ऊपर से मँहगाई मार ।।
भोतई बिगड गये हालात ।
नओ बरस----------------------
बसंत भओ है पतझड,
रितुअन ने पल्टी खाई ।
सूके तेसू मौर आम के ,
हरे रूख की सामत आई ।।
देखो अखियन से नही जात ।
नओ बरस----------------------
नदियाँ नारे, कुआँ तलैयां,
पानी बचो है नईयाँ ।
दर-दर भटक रहे है सारे ,
किलपत भूखी गईयाँ ।।
अब काँ सें कैसे है खात ।
नओ बरस----------------------
पानी ढूढत-ढूढत,
जीव जन्तु है आ रये ।
घात लगायें बैठे शिकारी,
मार-मार कें खा रये ।।
जीव-जन्तु हो रये समाप्त ।
नओ बरस----------------------
हरी-भरी फसलन हाँ देखो,
मन मस्ती में छात ।
सूनो खेत देख कें भईया,
पाँव धरे नहीं जात ।।
बैठे धरें करम पे हात ।
नओ बरस----------------------
छोटे-छोटे बच्चे बिलखें,
फूट-फूट कें रो रये ।
मेहनत कश मजदूर किसान
देख कें आपा खो रये ।।
धरें सरकार हात पे हात ।
नओ बरस----------------------
भूखे प्यासे ढोर रभा रये ,
देख कें रो-रो आवे ।
येसो कभऊ नहीं है देखो ,
लगत कहाँ भग जावे ।।
कैसे कटै अन्धेरी रात ।
नओ बरस----------------------
जनम-जनम रिस्ते नाते,
पानी नें बिसराये ।
लोकलाज सब भूल भाल कें,
निकर घरन सें आये ।।
पानी कैंसें है मिल पात ।
नओ बरस----------------------
कुआँ पम्प और खाद बीज हाँ ,
बैंक सें कर्जा लओ ।
ब्याज पै ब्याज लगो जब ई पै ,
जुर कें मुलक्को भयो ।।
अब काँ सें कैसें चुकात ।
नओ बरस----------------------
जिनके कुआँ में हतो तो पानी ,
उन नें बोई चना उनारी ।
जाडो भओ लग गयो तुसार ,
फसल भई सब कारी ।।
बिजली काट दई सब शासन नें अब की सें हैं कात ।
नओ बरस----------------------
बिजली पानी कछू है नईयाँ,
फिर भी बिल हैं आये ।
जुर कें रूपया इतनो हो गयो,
बसूली सरकार कराये ।।
सुनत नहीं कोऊ की बात ।
नओ बरस----------------------
सरकार करो घोषित सूखा ,
सूखा राहत आओ।।
लाँच खोर अफसर नेतन नें,
मिल बाट कें खाओ ।।
बैठे हते लगायें घात ।
नओ बरस----------------------
नयी-नयी सौगात ।
शनीदेव की बक्र है दृष्टि,
उलट-पलट मात ही मात ।।
बीज बोव बरसो न पानी,
दुविधा में आ गओ इन्सान ।
बीज बुबाई,रकम गमाई,
निर्धन हो गयो किसान ।।
अब के बरस न भई बरसात ।
नओ बरस----------------------
कछू तो सोचो कछू भओ है,
खेती किसान की करतार ।
बिन खेती के घरी न बीते,
ऊपर से मँहगाई मार ।।
भोतई बिगड गये हालात ।
नओ बरस----------------------
बसंत भओ है पतझड,
रितुअन ने पल्टी खाई ।
सूके तेसू मौर आम के ,
हरे रूख की सामत आई ।।
देखो अखियन से नही जात ।
नओ बरस----------------------
नदियाँ नारे, कुआँ तलैयां,
पानी बचो है नईयाँ ।
दर-दर भटक रहे है सारे ,
किलपत भूखी गईयाँ ।।
अब काँ सें कैसे है खात ।
नओ बरस----------------------
पानी ढूढत-ढूढत,
जीव जन्तु है आ रये ।
घात लगायें बैठे शिकारी,
मार-मार कें खा रये ।।
जीव-जन्तु हो रये समाप्त ।
नओ बरस----------------------
हरी-भरी फसलन हाँ देखो,
मन मस्ती में छात ।
सूनो खेत देख कें भईया,
पाँव धरे नहीं जात ।।
बैठे धरें करम पे हात ।
नओ बरस----------------------
छोटे-छोटे बच्चे बिलखें,
फूट-फूट कें रो रये ।
मेहनत कश मजदूर किसान
देख कें आपा खो रये ।।
धरें सरकार हात पे हात ।
नओ बरस----------------------
भूखे प्यासे ढोर रभा रये ,
देख कें रो-रो आवे ।
येसो कभऊ नहीं है देखो ,
लगत कहाँ भग जावे ।।
कैसे कटै अन्धेरी रात ।
नओ बरस----------------------
जनम-जनम रिस्ते नाते,
पानी नें बिसराये ।
लोकलाज सब भूल भाल कें,
निकर घरन सें आये ।।
पानी कैंसें है मिल पात ।
नओ बरस----------------------
कुआँ पम्प और खाद बीज हाँ ,
बैंक सें कर्जा लओ ।
ब्याज पै ब्याज लगो जब ई पै ,
जुर कें मुलक्को भयो ।।
अब काँ सें कैसें चुकात ।
नओ बरस----------------------
जिनके कुआँ में हतो तो पानी ,
उन नें बोई चना उनारी ।
जाडो भओ लग गयो तुसार ,
फसल भई सब कारी ।।
बिजली काट दई सब शासन नें अब की सें हैं कात ।
नओ बरस----------------------
बिजली पानी कछू है नईयाँ,
फिर भी बिल हैं आये ।
जुर कें रूपया इतनो हो गयो,
बसूली सरकार कराये ।।
सुनत नहीं कोऊ की बात ।
नओ बरस----------------------
सरकार करो घोषित सूखा ,
सूखा राहत आओ।।
लाँच खोर अफसर नेतन नें,
मिल बाट कें खाओ ।।
बैठे हते लगायें घात ।
नओ बरस----------------------